Saturday, December 27, 2014

ये आख़िरी धागा

बस ये एक आख़िरी धागा है
बड़ा ही पतला,
हाथ में लेने पर
माँझे सा काट लेता है

सरसरा कर निकल जाएगा
पर चुभेगा
फिर भी हाथ से जाने
नहीं देना

पतंग की जान इससे जुड़ी है
छूटे ही आकाश से सरर से
 ज़मीं पर आजाएगी,
बड़े रंग है इस पतंग में
धूप में चमकते
पर इस्की साँस
उस एक आख़िरी धागे से जुड़ी है
और उस पतंग पर बहुत बच्चों की मुस्कान थमी है
मुस्कानों को बचाने के लिए
पतंग आसमान चूमती रहे तो बेहतर है

इश्स ज़ोर हवा के थपेड़ों में आसान नहीं

फिर भी ये आख़िरी धागा
थामे रखना,

यूँ ही,
सबके पास होगा एक आख़िरी धागा
साँस का, विश्वास का और आभास का
चुभता हुवा सा, वो आख़िरी धागा
जो जीवन और मृत्यु के बीच होता है

उस आख़िरी धागे को थामे रखना

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