Thursday, August 23, 2012

Paanch Saal

कुछ रिश्तों में दूरियाँ आ गयीं
और कुछ टूट ही गये !
पर ज़िंदगी ना रुकी कहीं
और ना सपने कहीं गये !!

फिर रिश्ता ज़िंदगी और सपनों से क्यूँ नहीं ? 

Shweta

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