समय की इस जर्जर व्यवस्था में
माँ बनना साहस का कार्य है
अपने लिए सिर्फ़ ये माँग लेना की
छुट्टी हो तो घर आ जाना बेटा
ये भी बड़े क़र्ज़ जैसा लगता है
माँ बनना साहस का कार्य है
अपने लिए सिर्फ़ ये माँग लेना की
छुट्टी हो तो घर आ जाना बेटा
ये भी बड़े क़र्ज़ जैसा लगता है
कभी ये सोच लेना की
शायद थक कर सो गया होगा
बेटे की नींद में बूढी माँ का सुकून
समय की जर्जर व्यवस्था में
बस ये नहीं बदला
शायद थक कर सो गया होगा
बेटे की नींद में बूढी माँ का सुकून
समय की जर्जर व्यवस्था में
बस ये नहीं बदला
बदला तो बस इतना,
की अब माँ की ज़रूरत नहीं होती बेटों को
सिर पर हाथ रखने की
और माँ, अपने हाथ को हाथ पर रख कर
सो जाती है,
ये सोच कर की, छुट्टी होगी तो
बेटा घर आएगा
की अब माँ की ज़रूरत नहीं होती बेटों को
सिर पर हाथ रखने की
और माँ, अपने हाथ को हाथ पर रख कर
सो जाती है,
ये सोच कर की, छुट्टी होगी तो
बेटा घर आएगा
समय की जर्जर व्यवस्था में
बेटे का घर बदल गया
बेटे का घर बदल गया
- श्वेता सिंघ
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